पंकज त्रिपाठी की जीवनी | Pankaj Tripathi Full Biography |

परिवार

पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के छोटे से गाँव जिसका नाम बेलसंद है जो की गोपालगंज district में आता है में हुआ था |पंकज त्रिपाठी की जीवनी

उनके परिवार में उनके माता-पिता, उनके बड़े भाई जिनका नाम विजेंद्र तिवारी है  जो की पंकज  से 15 साल बड़े है और उनकी 2 बड़ी बहने है, बचपन से ही पंकजकी दिलचस्पी पढाई में कुछ ज्यादा थी नहीं वो हमेशा अपने बड़े भाई से बाहर घुमने के चक्कर में मार खाया करते थे

पंकज का पहले नाम शुभ नारायण था लेकिन बाद में उनका नाम पंकज हुआ लेकिन ये बात तो पंकज को भी नहीं पता की नाम कैसे बदल गया |

जब पंकज के बड़े भाई उनका दाखिला करवाने school लेके गये तब वंहा के टीचर ने पूछा की इसका जन्म कब हुआ था अब उनके बड़े भाई आसमान की तरफ देखने लगे क्योंकि उनको भी नहीं पता था |

लेकिन उनको याद आया की हां महिना तो सितम्बर है लेकिन अब उनको तारीख  याद ना आये तो उन्होंने ने बोल दिया 5 सितम्बर क्योंकि 5 सितम्बर को टीचर डे होता है | लेकिन पंकज का असल में जन्म किसी और तारीख को हुआ था वो हम आगे देखेंगे |

पंकज त्रिपाठी जब 9th क्लास में थे तब उन्होंने पहली फिल्म “अँधा कानून” देखी थी जिसका मतलब भी उनको  नहीं पता था | कानून को उन्होंने नून पढ़ लिया था और सोचे शयद अँधा नमक है |पंकज त्रिपाठी की जीवनी

एक दिन पंकज त्रिपाठी के गाँव राम नवमी को टेंट डाल कर लोगो ने फिल्म लगाई जिसका नाम “नाम” था | लेकिन पंकज को पता नहीं था की गाँव के लोगो ने वो फिल्म illegal लगाई हुए थी, इसलिए वंहा एकदम से पुलिस वाले आ जाती है और सबको मरना शुरू कर देते है जिसमे पंकज को भी एक डंडा पीछे से पड़ता है |

पंकज जिस school में पढ़ते थे उसका नाम धरिक्षण प्रसाद उच्चांगल था | किसी ने पंकज से पूछा ये उच्चांगल का मतलब क्या होता है तो पंकज बताते है की उच्च मतलब high और आंगल मतलब English.

आर्थिक हालत 

पंकज के पिताजी एक किसान है, पंकज बचपन में दुसरो के खेतों में पानी देने का काम करते थे जिसमें उन्हें एक घंटे के 12 रूपए मिलते थे | खेती से  गुजरा ना चल पाने के कारण पंकज के पिताजी किसानी के साथ पंडिताई भी करते थे |speakingkitaab.com

शाम को पंकज के पिताजी 12 किलोमीटर चल कर अपने घर आते थे, साथ में कंधे पर मिठाई और फल लाद के लाया करते थे, लोग जो शादी में चढ़ाया करते थे |

पंकज त्रिपाठी जी के घर में आजतक  भी  टीवी नहीं है हालाँकि वो टीवी खरीद सकते है लेकिन उनके माता-पिता मना करते है की उनको टीवी नहीं चाहिए उनके लिए दिक्कत होगा |पंकज त्रिपाठी की जीवनी

एक दिन पंकज का कोई फेन उनके गाँव उनके घर पहुँच जहाँ उनके माता-पिता है, तब माता ने फेन से बोला तुम मेरे बेटे को जानते हो, वो बोला हां जनता हूँ, माता बोली वो तुमको जनता है फेन बोला नहीं वो मुझे नहीं जानते है, तो माता बोली तो ऐसे कैसे फिर तुम एक दुसरे को जानते हो | पंकज के माता-पिता जो एक तक ये नहीं पता है की उनका बेटा भारत में कितना ज्यादा प्रसिद्ध है |

पंकज बताते है की कोई भी किसान खाते वक़्त अपनी थाली में एक भी चावल का दाना नहीं छोड़ता है जो भी थाली में मिलता है उसको पूरा खा कर ही उठता है क्योंकि उसको  हर एक दाने को उपजाने का दर्द मालूम है |

नेता लोग  टीवी पर बैठ कर किसान के लिए डिबेट करते है लेकिन असल में उनको किसान का दर्द नहीं मालूम है |

कॉलेज और जेल

पंकज एक अच्छे स्प्रिंटर थे साथ ही खो खो बहुत अच्छा खेलते थे, जब वो कॉलेज में गये तब एक आन्दोलन में लग गये, उस आन्दोलन में एक “आत्मा घाती दस्ता” के मुखिया थे, और उनके ग्रुप का  काम विधान सभा में घुस कर नारे लगाने का था, की सरकार निक्कमी है corrupt है वगेरा वगेरा…speakingkitaab.com

उनके ग्रुप में कुल 13 लोग थे, वंहा बहुत सारी पुलिस खड़ी थी इसलिए उनमे से कुछ लोग डर गये और बोले हम आगे नहीं जायेंगे, लेकिन पंकज और उनके साथ जो बचे थे बोले हम चलेंगे, फिर वो आगे चल दिए और जोर जोर से नारे लगाने लगे |

पंकज और उसके साथी  जब नारे लागा रहे थे तभी वंहा एक नौजवान लड़का आया और पंकज त्रिपाठी को खिंच के एक थप्पड़ मारा, पंकज को पता नहीं था की वो कौन है इसलिए पंकज ने भी जोस में उसको धक्का दे दिया लेकिन वो नौजवान वंहा का district magistrate था |

फिर वंहा खड़े पुलिस वाले पंकज को पीछे ले गये और बहुत देर तक उनको को मारते रहे, बहु डंडे मारे, लेकिन पंकज ने बेहोश  होने ना नाटक किया और बच गये |

उसके  बाद पंकज को जेल भेज दिया गया जंहा वो 7 दिन तक रहे और पहली बार पंकज ने जेल को अन्दर से देखा था | जेल के पीछे ही एक रेलवे ट्रैक था जहाँ से ट्रेन आया जाया करती थी, पंकज ट्रेन की आवाज़ सुन पाते, लेकिन उसको देख नहीं पाते |पंकज त्रिपाठी जेल गये थे

मन में सोचते की कोनसे रंग की ट्रेन होगी लाल होगी या नीली होगी राजधानी होगी या कोई दूसरी होगी, तब पंकज को अहसास हुआ की हाँ जेल इसी को बोलते है |

पंकज को जेल में कुछ ऐसे भी लोग मिले जो बोले की हम तो बस पेड़ काट रहे थे और हमें उठा के जेल में डाल दिया, कोई जमानत करने वाला भी  नहीं है  और 4 साल से यंही पर हूँ |

तुम बाहर जाओ तो हमारे लिए कुछ करना और कुछ ऐसे मिले जो बस जेल में ही रहना चाहते थे उनको बाहर नहीं जाना था आराम से खाना पीना सब मिल रहा है |

जेल में एक लाइब्रेरी भी थी जंहा पंकज को पढाई करने का भी शौक हुआ, वंहा उन्होंने हिंदी लिटरेचर की काफी सारी books पढ़ी और कुछ वामपंथी विचार धारा  के लोग भी मिले जिन्होंने उन्हें  स्ट्रीट play करने के लिए भी बोला |speakingkitaab.com

जब पंकज को 7 दिन बाद जेल से छोड़ा गया तब उनके हाथ पर एक मोहर लगा दी, जेल वाले मोहर इसलिए लगते थे ताकि वो व्यक्ति कोई भी transport में उस मोहर को दिखाकर घर जा साके इसलिए पंकज ने अपनी आस्तीन ऊपर कर ली, और जब बस वाले ने टिकट मांगी तो पंकज के हाथ दिखा दिया उसको देख कर कंडक्टर ने डर के ये भी नहीं पूछा की क्यों गये थे जेल में |

प्रेम कहानी

1986 में पंकज के बड़े भाई ने एक तकनीक की खोज कर के अपने गाँव में सबसे पहले अपने घर में एक टॉयलेट बनाया था |

पंकज त्रिपाठी की बहन की शादी कोलकता में तय हुई थी, जंहा उनके घर में टॉयलेट नहीं था इसलिए पंकज के बड़े भाई ने मुख़्तार जो एक मिस्त्री था, को टॉयलेट बनाने के लिए उनके गाँव में भेजा वो, मुख़्तार वंहा गया और मृदुला को देखा |

वापस आकर मुख़्तार ने विजेंद्र तिवारी से बोल दिया की समान वगेरा बोल दिया है बन जायेगा टॉयलेट उसके बाद मुख़्तार पंकज के पास आकर बोला की वंहा एक पतली सी बिलकुल हिरनी जैसे एक लड़की है मेरे हिसाब से तुम दोनों की जोड़ी अच्छी रहेगी जब तिलक करने जाओगे तो एक बारी देख लेना |speakingkitaab.com

अब पूरी रात पंकज बस उसी हिरनी के बारे में सोचते रहे और अगले दिन जब तिलक के लिए गये तो एक पतली ही बिलकुल हिरनी जैसी लड़की देखी और देखते ही समझ गये की यही  है वो लड़की, और पंकज को भी मृदुला ने नोटिस किआ था |

फिर उसके बाद बहन की शादी हो गयी पंकज अपने गाँव और मृदुला अपने गाँव | लेकिन पंकज कभी कभार उनके घर जाये करते थे और मृदुला की माँ से बैठ कर बाते किया करते थे |

और उनके घर छिट्ठी भी भेजा करते थे और उसमे सबसे निचे लिखते थे, माँ को नमस्ते और छोटी को प्यार, पुरे घर में एक ही छोटी थी मृदुला |speakingkitaab.com

लेकिन बाद में मृदुला की शादी कही और तय हो गयी थी, पंकज भी लड़का देखने गये थे, वो लड़का हैदराबाद में काम करता था वो भी मृदुला को चिट्ठी भेजा करता था | पंकज तो बस 1 पन्ने की चिट्ठी भेजते थे लेकिन वो लड़का तो 8-8 पन्नो को चिट्ठी भेजता था |

तब पंकज ने मृदुला को बोला की देख लो अगर करना है तो कर लो लड़का तो अच्छा है

पंकज त्रिपाठी की प्रेम कहानी

लेकिन मुझे जैसा दिल नहीं मिलेगा और अगर 4-5 साल भी कोई दिक्कत आये तो में यही तुम्हारा इन्तेजार करता हुआ मिलूँगा |

लेकिन finally मृदुला की शादी पंकज से हुई | और जब शादी हुई तब पता चल की पंकज का जन्म 5 सितम्बर नहीं बल्कि 28 सितम्बर को हुआ था |

National school of drama  

national school of drama के लिए पंकज ने 2 बार एग्जाम दिया लेकिन दोनों बार उनका नहीं हुआ था | पंकज 6 साल से NSD के लिए तैयारी कर रहे थे |

दूसरी बार पंकज जब अपना result देखने वंहा गये थे, उन्होंने देखा की उनका नहीं हुआ है लेकिन उनका नाम वेटिंग लिस्ट में था |

वंहा एक और बच्चा था जिसका भी नहीं हुआ था तो उसको गुस्सा आ गया और उसके पास में रखे गमले को उठा कर अम्बेसडर की गाडी में दे मारा गाडी का सीशा तोड़ दिया इसलिए ये rule निकले की अगली बार से result घर पर गया यंहा कोई लिस्ट नहीं लगेगी |speakingkitaab.com

तीसरी बार पंकज ने एग्जाम दिया, result के बाद डाकिया चिट्ठी लेकर पंकज के घर जिसमे पंकज का एग्जाम पास हो गया था, पंकज बहुत खुश हुआ, उसके बाद एनएसडी में पढाई पूरी की |

मुम्बई

16 अक्टूबर 2004 को पंकज और उनकी पत्नी मृदुला दोनों मुम्बई 46,000 रूपए लेकर पहुँचते है, पंकज के दोस्त भानु ने बोला था की तू मुम्बई आजा |

दो महीने तक पंकज और उनकी पत्नी दोनों भानु के घर पर ही रहे थे , 2 महीने बाद पंकज के पास सिर्फ 10 रूपए बचे |

मृदुला ने बी.एड पूरी कर ली थी इसलिए पंकज ने बोला तुम कोई नौकरी कर लो, तब दोनों ने जाकर एक school में जॉब के लिए apply किया और उसमे मृदुला का सिलेक्शन हो गया, जहाँ उन्हें महीने के 7000 रूपए  मिलते थे |

2004 में पंकज ने अपनी पहली फिल्म “Run” में काम किआ जिसमे उनका नाम तक नहीं था | पंकज ने अपना सबसे पहला रोल सोनी के किसी टीवी शो में किआ था जंहा उन्हें 1700 रूपए |

2004 से लेकर 2012 तक उनको कोई बड़ा काम नहीं मिला था 8 साल तक उनका संघर्ष चला | मृदुला कमा लेती थी इसलिए घर का खर्चा चल जाता था |

पंकज त्रिपाठी की जीवनी

पंकज बताते है की जैसा उनका पालन पोषण हुआ था और जैसा उनका बचपन था इसलिए उन्हें कभी भी मुसीबत, मुसीबत जैसी लगी ही नहीं थी |

गाँव में उन्हें कभी बिजली ना होने का गम नहीं हुआ इतने सालो तक कोई ढंग का काम नहीं मिला उसका गम नहीं हुआ, वो कहते अगर आज भी कोई उन्हें धर्मशाला में रुकने के लिए कहे तो वो बिलकुल वंहा रुक जायेंगे और उन्हें कोई गम उन्ही होगा |

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गैंग्स of वासेपुर

गैंग्स of वासेपुर के लिए पंकज ने 7 घंटे तक ऑडिशन दिया था, जिसमे उनसे सुलतान के सारे रोल कराये गये थे |speakingkitaab.com

शुरुआत में अनुराग को पंकज की एक्टिंग ज्यादा पसंद आई नहीं थी फिर उन्होंने पंकज को बोला जाओ कांटेक्ट लेंस पहन कर करो, उसी समय पंकज को बुखार भी आ गया था पंकज ने बाहर जाकर गोली खाई और फिर से बुखार में ही ऑडिशन दिया |फिर  कही जाकर पंकज का उस फिल्म के लिए सिलेक्शन हुआ |

उस समय पंकज टीवी शो में काम करते थे, मूवी का बजट ज्यादा था नहीं इसलिए पंकज को मूवी में कम और टीवी शो में ज्यादा पैसे मिल रहे थे |

पंकज को बोला तुम्हे ट्रेन से आना होगा क्योंकि समय की कमी थी, टीवी शो मुम्बई में करते थे और मूवी की शूटिंग राजस्थान में होनी थी इसलिए पंकज में मना कर दिया की में नहीं कर पाउँगा लेकिन उनके एक दोस्त ने बोला की यार क्यों मना कर रहा है 2-4 बरी में फ्लाइट के पैसे दे दूंगा बस तू 1-2 बारी ट्रेन से आजाना, मूवी में 5 दिन का काम था पंकज का |speakingkitaab.com

पंकज जब मूवी कर रहे थे तब उनको बिलकुल अंदाजा नहीं था की वो मूवी के बाद इतने ज्यादा फेमस हो जायेंगे |

जब फिल्म रिलीज़ हुई तब पंकज त्रिपाठी  को पता तक नहीं था की फिल्म आ गयी है क्योंकि पंकज कही भी social media पर नहीं थे, रात को अनुराग ने पंकज को फोन किआ और बोले तुम्हे पता है सब तुम्हारे बारे में पूछ रहे है की ये सुलतान कौन है बहुत अच्छा एक्टर है |

वासेपुर के बाद पंकज की ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल गयी, 2013 में पंकज ने एक शोर्ट फिल्म बिना पैसे के की थी, जबकि शोर्ट फिल्म के डायरेक्टर को पंकज जानते तक नहीं थे |

पंकज बताते है की अगर फिल्म अच्छी है उसका सन्देश अच्छा है लोगो को कुछ सीख मिलेगी तो वो जरुर उस फिल्म को करते है फिर चाहे उसके लिए उन्हें पैसे कम ही क्यों ना मिले |

पंकज त्रिपाठी के लिए आज भी पैसो से ज्यादा जरुरी उनकी एक्टिंग है, उनकी पत्नी मृदुला पंकज को “पति” बुलाती है और बोलती है की पति बहुत ज्यादा सीधे एक्टर है और पैसो को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं रहते है | जो बात मृदुला को पसंद नहीं आती है |

पंकज त्रिपाठी जी का सन्देश
पंकज त्रिपाठी की जीवनी

फ़ैल हो जाओ लेकिन कभी हारो मत, कभी हारो मत…..हम जो भी बनते है उसका कारण हम खुद ही होते है ना की कोई  ओर …दुसरो को कोसो मत खुद से लड़ो और जीत जाओ !


आशा करता हूँ आपको ये motivation से भरी पंकज त्रिपाठी की  सच्ची कहानी जरुर पसंद आई होगी….अगर हाँ तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें |

 

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